भारत में गैस संकट है या अफवाह… पर हर संकट में सिस्टम क्यों फेल हो जाता है?

Updated: Aug 26
भारत में गैस संकट सच है या अफवाह? LPG सिलेंडर की कमी, सिस्टम की तैयारियों और संकट के समय सामने आने वाली व्यवस्थागत चुनौतियों पर उठते सवाल।

इन दिनों देश के कई हिस्सों से रसोई गैस सिलेंडर की कमी की खबरें आ रही हैं। कहीं गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं, कहीं होटल और रेस्टोरेंट परेशान हैं, और कहीं लोग यह समझ नहीं पा रहे कि गैस की बुकिंग करें या पहले यह पता लगाएं कि यह खबर सच है या सिर्फ अफवाह।
अब भारत में गैस संकट सच है या अफवाह, यह तो आने वाला वक्त बता ही देगा।
लेकिन एक बात अभी से साफ दिखाई दे रही है — संकट के समय हमारा सिस्टम अक्सर फेल हो जाता है।
दरअसल हमारे देश में एक अनोखी परंपरा है। संकट आने से पहले तैयारी कम होती है, और संकट आने के बाद बैठकें ज्यादा होती हैं।
जब सब कुछ सामान्य होता है, तब व्यवस्था इतनी आत्मविश्वास से भरी रहती है जैसे सब कुछ पूरी तरह नियंत्रण में हो। लेकिन जैसे ही कोई समस्या सामने आती है चाहे वह गैस की हो, पेट्रोल की हो या बढ़ते प्रदूषण की तब अचानक पता चलता है कि व्यवस्था की असली मजबूती कितनी है।
फिर शुरू होता है वही पुराना सिलसिला। कहीं कहा जाता है कि सब कुछ सामान्य है। कहीं कहा जाता है कि सप्लाई में थोड़ी दिक्कत है। और कहीं जिम्मेदार लोग इतने आश्वस्त दिखाई देते हैं जैसे समस्या केवल जनता की कल्पना में हो।
इस बीच जनता हमेशा की तरह लाइन में खड़ी रहती है कभी गैस के लिए, कभी पैसों के लिए, और कभी जवाब के लिए।
सवाल यह है कि अगर सच में कोई बड़ा संकट आ जाए, तो क्या हमारा सिस्टम उससे निपटने के लिए तैयार है? क्योंकि हमारे यहाँ संकट अक्सर अचानक नहीं आते… लेकिन तैयारी हमेशा अचानक ही शुरू होती है।
संकट से ज्यादा खतरनाक है… संकट के लिए तैयार न होना।
