3 फीट का कद… लेकिन सिस्टम से ऊँचा हौसला — Dr. Ganesh Baraiya की कहानी और उस सोच पर सवाल जो अक्सर लोगों को उनके कद, शरीर या कमजोरी से मापती है।
- उठते सवाल
- Mar 27
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भारत में अक्सर कहा जाता है कि अगर आप अलग हैं, तो सिस्टम आपको रोकने की कोशिश जरूर करेगा। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो रुकते नहीं, बल्कि सिस्टम को ही बदलने पर मजबूर कर देते हैं। ऐसी ही कहानी है Dr. Ganesh Baraiya की।
गुजरात के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे गणेश बारैया की ऊँचाई महज 3 फीट है। उन्हें ड्वार्फिज़्म के कारण 72% दिव्यांगता है। लेकिन बचपन से उनका सपना साफ था—डॉक्टर बनना और लोगों का इलाज करना।

साल 2018 में उन्होंने देश की सबसे कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षा National Eligibility cum Entrance Test (NEET) पास कर ली। यह किसी भी छात्र के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। लेकिन गणेश के लिए असली लड़ाई इसके बाद शुरू हुई।
मेडिकल शिक्षा की उस समय की नियामक संस्था Medical Council of India ने यह कहकर उन्हें MBBS में प्रवेश देने से मना कर दिया कि उनकी ऊँचाई कम है और वे डॉक्टर का काम ठीक से नहीं कर पाएंगे।
यानी सवाल यह नहीं था कि उन्होंने परीक्षा पास की है या नहीं, बल्कि यह था कि उनका कद कितना है।
लेकिन गणेश बारैया ने हार नहीं मानी। उन्होंने इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू की और मामला अंततः देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India तक पहुँच गया।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा— किसी इंसान की ऊँचाई उसके डॉक्टर बनने की क्षमता तय नहीं कर सकती।
इस फैसले के बाद गणेश को गुजरात के Government Medical College Bhavnagar में MBBS में प्रवेश मिला। कई चुनौतियों, मुश्किल प्रैक्टिकल और शारीरिक सीमाओं के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की।
आज वही गणेश बारैया डॉ. गणेश बारैया हैं — एक ऐसे डॉक्टर, जिनका कद भले ही 3 फीट हो, लेकिन उनका हौसला उस सिस्टम से भी ऊँचा निकला जिसने कभी उन्हें रोकने की कोशिश की थी।

यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता नहीं है। यह उस सोच पर सवाल है जो अक्सर लोगों को उनके कद, शरीर या कमजोरी से मापती है।
अगर Dr. Ganesh Baraiya समाज की इसी सोच की वजह से हार मान लेते, तो हमारे देश में एक डॉक्टर कम हो जाता। कभी-कभी एक इंसान की जिद सिर्फ उसकी जिंदगी नहीं बदलती, बल्कि पूरे सिस्टम को आईना दिखा देती है।