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मैराथन के नाम पर जोखिम: आयोजकों और प्रशासन की जिम्मेदारी पर प्रश्नचिह्न

  • Writer: उठते सवाल
    उठते सवाल
  • Feb 26
  • 2 min read

Updated: Mar 5

Bansal Pankh Marathon - Bhopal Marathon - Traffic Management Bhopal - Bhopal Administration


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ट्रैक्टर और मैराथन प्रतिभागी आमने-सामने

भोपाल में आयोजित बंसल पंख मैराथन की जो तस्वीरें सामने आई हैं, उन्होंने शहर में मैराथन जैसे सार्वजनिक खेल आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।


प्रतिभागियों के बीच भारी वाहन, कारें और बाइकें स्पष्ट रूप से नजर आ रही हैं—जो किसी भी क्षण गंभीर दुर्घटना को न्योता दे सकती थीं। चिंताजनक यह भी है कि चलते यातायात के दौरान बीच सड़क पर एक प्रतिभागी बैठी दिखाई दे रही है।


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चलते यातायात के दौरान एक प्रतिभागी बीच सड़क पर बैठी हुई
कार की टक्कर से बाल-बाल बचता हुआ बच्चा
कार की टक्कर से बाल-बाल बचता हुआ बच्चा

यह दृश्य केवल एक चूक नहीं, बल्कि आयोजन प्रबंधन, ट्रैफिक नियंत्रण और सुरक्षा समन्वय की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है।


मैराथन निस्संदेह एक सकारात्मक और स्वास्थ्यवर्धक पहल है। यह किसी भी शहर की जीवंतता, सामुदायिक भागीदारी और नागरिक उत्साह का प्रतीक बन सकती है। किन्तु प्रश्न तब उठता है जब इसे ऐसे शहरी परिवेश में आयोजित किया जाए, जहां तेज गति और लापरवाही से वाहन चलाना, ट्रैफिक जाम, अव्यवस्थित पार्किंग और सिग्नल उल्लंघन जैसी समस्याएँ आम हों।

भोपाल जैसे शहर में, जहाँ यातायात प्रबंधन स्वयं एक निरंतर चुनौती बना हुआ है, खुले सार्वजनिक मार्गों पर हजारों प्रतिभागियों के साथ मैराथन आयोजित करना क्या पर्याप्त तैयारी और जोखिम मूल्यांकन के बाद किया गया निर्णय था?


यदि नियमित दिनों में भी ट्रैफिक नियंत्रण पूरी तरह प्रभावी नहीं है, तो फिर बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भरोसा किस आधार पर दिया जाता है?


यह खेल भावना के विरोध का प्रश्न नहीं है—यह सुरक्षा, जवाबदेही और सुविचारित शहरी प्रबंधन का प्रश्न है।


सड़कें मूल रूप से यातायात के लिए बनाई जाती हैं। दौड़ जैसे आयोजनों के लिए विशेष ट्रैक, स्टेडियम या पूर्णतः नियंत्रित मार्गों की आवश्यकता होती है। दुनिया के बड़े शहरों में मैराथन उन्हीं मार्गों पर कराई जाती हैं जहां या तो ट्रैफिक पूरी तरह रोका जा सके या जहां वैकल्पिक मार्गों की ठोस व्यवस्था हो।


भोपाल में क्या ऐसी योजना बनाई गई थी? और अगर बनाई गई थी तो प्रतिभागियों के समीप वाहन कैसे पहुँचे?


आयोजकों को समझना चाहिए कि लोकप्रियता या प्रचार के लिए नागरिकों की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती।

ऐसे आयोजन तभी संभव हैं—


  • जब मार्ग पूर्णतः सुरक्षित हो

  • जब ट्रैफिक डायवर्जन प्रभावी हो

  • जब आपातकालीन चिकित्सा सुविधा तुरंत उपलब्ध हो

  • जब स्थानीय प्रशासन और ट्रैफिक विभाग समन्वित रूप से काम करे


खेल और स्वास्थ्य को बढ़ावा देना आवश्यक है। लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक है — नागरिकों की सुरक्षा। यदि व्यवस्था पुख्ता न हो, तो उत्सव कभी भी हादसे में बदल सकता है।

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