Indore EV Fire Incident | इंदौर EV अग्निकांड: प्रशासनिक भ्रष्टाचार और नागरिक लापरवाही का 'डेथ ट्रैप'; अवैध निर्माण, 10 सिलेंडर और अवैध चार्जिंग...
- उठते सवाल
- Mar 20
- 3 min read
Updated: Mar 21
Indore EV Blast - Indore EV Fire Incident - Indore News

इंदौर में हाल ही में हुआ EV अग्निकांड जिसमें 8 जानें चली गईं केवल एक शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी की कहानी नहीं है। यह उस सिस्टम की कहानी है जहाँ -
नियमों को ताक पर रखकर इमारतें खड़ी होती हैं, रिहायशी इलाकों में अवैध भंडारण होता है और प्रशासन तब तक सोता रहता है जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए।
यह घटना कई बंद फाइलों और बंद आंखों को खोलने के लिए काफी है। ‘उठते सवाल’ आज उन जिम्मेदार लोगों से जवाब मांगता है जिनकी लापरवाही ने एक पूरे मोहल्ले को मौत के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया।
1. बिल्डिंग परमिशन या भ्रष्टाचार का नक्शा?

हादसे वाली तीन मंजिला इमारत खुद नियमों के उल्लंघन की गवाही दे रही है। बिल्डिंग by-laws के मुताबिक ऐसी इमारतों में ओपन स्पेस और फायर सेफ्टी का प्रावधान अनिवार्य होता है। लेकिन यहां हालात ऐसे थे कि इमारत के चारों तरफ एक इंच भी खुली जगह नहीं छोड़ी गई। मकान के अंदर पर्याप्त पार्किंग स्पेस ना होने की वजह से ईवी कार भी बाहर सड़क पर ही खड़ी रहती थी और चार्ज होती थी।
उठता सवाल: इंदौर नगर निगम के अधिकारियों ने आखिर यह नक्शा पास कैसे कर दिया? ऐसे मकानों के बनने के पहले और बनने के बाद सुरक्षा की अनदेखी क्यों की जाती है?
2. रिहायशी इलाके में 'बम' का ढेर

हादसे के बाद इमारत से 10 एलपीजी सिलेंडर और भारी मात्रा में पॉलीमर केमिकल मिलने की खबर सामने आई।रिहायशी इलाके में इस तरह का खतरनाक स्टॉक किसी भी छोटी आग को भीषण विस्फोट में बदल सकता था।
उठता सवाल: रिहायशी इलाकों में यह अवैध औद्योगिक भंडारण किसकी शह पर चल रहा था? क्या प्रशासन और संबंधित विभाग केवल तब जागते हैं जब हादसे में लोगों की जान चली जाती है?
3. लापरवाही की हद: सड़क पर चार्जिंग

बताया जा रहा है कि आग की शुरुआत एक इलेक्ट्रिक कार से हुई जो सड़क पर खड़ी होकर चार्ज की जा रही थी। सार्वजनिक सड़क पर हाई-वोल्टेज चार्जिंग करना न केवल अवैध है बल्कि बेहद खतरनाक भी।
उठता सवाल: क्या एक आम नागरिक की जिम्मेदारी नहीं बनती? 'स्मार्ट सिटी' के नागरिक कब समझेंगे कि उनकी एक छोटी सी लापरवाही पूरे मोहल्ले की जान जोखिम में डाल सकती है?
4. अतिक्रमण और तंग गलियाँ: दमकल के हाथ-पांव बंधे

जब आग लगी, तो फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ चाहकर भी समय पर नहीं पहुँच पाईं। तंग सड़कें और उन पर फैला अतिक्रमण राहत कार्य में सबसे बड़ी बाधा बना।
उठता सवाल: शहर की गलियों को निगलते अतिक्रमण पर प्रशासन का बुलडोजर कब चलेगा? क्या गली-मोहल्लों में अवैध कब्जों के कारण दमकल का रास्ता रुकना 'सरकारी हत्या' की श्रेणी में नहीं आता?
कागजी सफाई नहीं, कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए!
इंदौर अक्सर देश के सबसे स्वच्छ और बेहतर शहरों में गिना जाता है। लेकिन इस चमक के पीछे कई ऐसी इमारतें और अवैध गतिविधियां छिपी हैं जो किसी भी दिन बड़े हादसे की वजह बन सकती हैं।
क्या अब हम अगली बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहे हैं?